1. बिहार और उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम 1914 क्या है?
वह व्यक्ति जिस पर सरकारी बकाया है।
यदि आप इस अधिनियम की मूल पुस्तक (Bare Act) या पीडीएफ डाउनलोड करना चाहते हैं, तो आप निम्नलिखित स्रोतों का उपयोग कर सकते हैं:
2. उड़ीसा (ओडिशा) सरकार की आधिकारिक वेबसाइट
नगर निगम, जिला परिषद या पंचायतों का बकाया कर या शुल्क।
laws, Rameshwar stood firm. His lawyer argued that the procedure under
इस अधिनियम के अंतर्गत वसूली की प्रक्रिया चरणों में विभाजित है: अ) मांग (Requisition) - धारा 5
भारत के कानूनी इतिहास में, विशेष रूप से पूर्वी भारत में, सरकारी बकायों की वसूली एक महत्वपूर्ण विषय रहा है। , जिसे अक्सर 'पीडीआर एक्ट' (PDR Act) कहा जाता है, सरकारी बकायों (Public Demands) को तेजी से वसूलने के लिए एक विशेष प्रक्रिया निर्धारित करता है। यह कानून बिहार और झारखंड (पूर्ववर्ती बिहार-उड़ीसा) में आज भी प्रासंगिक है।
अधिनियम के तहत बकाया राशि वसूलने के लिए अधिकारी निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं: Bihar and Orissa Public Demands Recovery Act, 1914
While a full official PDF in Hindi is often accessed through specific legal portals or physical books like Bihar and Orissa Public Demand Recovery Act and Rules (Eng-Hindi) , below is a "useful paper" summarizing its core provisions and procedures in Hindi for your reference.
साक्ष्य लेना और गवाहों को बुलाना। 6. इस अधिनियम का महत्व
यह कानून 1 जुलाई, 1914 को लागू हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार या अधिसूचित संस्थानों (जैसे बैंक या निगम) की बकाया राशि, जिसे "सार्वजनिक मांग" (Public Demand) कहा जाता है, की वसूली के लिए एक प्रभावी और तेज प्रशासनिक प्रक्रिया प्रदान करना था। यह अधिनियम मुख्य रूप से बिहार और उड़ीसा (अब ओडिशा) के क्षेत्रों के लिए बनाया गया था, लेकिन झारखंड राज्य बनने के बाद वहां भी इसे संशोधनों के साथ अपनाया गया है।