जन्म तिथि और समय का महत्व
कुंडली में सूर्य या गुरु पर राहु-केतु का नकारात्मक प्रभाव होने से पितृ दोष बनता है, जिससे संतान उत्पत्ति में बाधा या पारिवारिक कलह होती है।
इनके आधार पर से ग्रहों की सटीत स्थिति निकाली जाती है और फिर 12 भावों वाली कुंडली तैयार की जाती है।
रोग, कर्ज, और शत्रु।
अपनी कुंडली में ग्रहों की स्थिति, भावों और दोषों का विश्लेषण करें। janam kundali by date of birth and time in hindi
व्यय (खर्च), मोक्ष, विदेश यात्रा और अस्पताल/जेल।
यदि आप अपनी कुंडली का विस्तार से विश्लेषण चाहते हैं:
वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी, और साझेदारी।
सटीक जन्म तिथि (दिन/महीना/वर्ष) चुनें। Can’t copy the link right now
कुंडली के 12 भाव और उनका महत्व
कुंडली का दसवां भाव आपकी आजीविका को दर्शाता है। कुंडली के विश्लेषण से यह जाना जा सकता है कि आपके लिए नौकरी बेहतर रहेगी या व्यापार, और किस क्षेत्र में आपको न्यूनतम प्रयास में अधिकतम सफलता मिलेगी।
जन्म कुंडली एक ऐसा ज्योतिषीय नक्शा है जो आपके जन्म के समय आकाश में ग्रहों की स्थिति को दर्शाता है। इसे 'जन्म पत्री' भी कहा जाता है और यह आपके जीवन के भविष्य, स्वभाव और भाग्य को समझने का एक मुख्य माध्यम है।
कुंडली के लिए आवश्यक जानकारी: जन्म तिथि (DOB)
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अपना नाम, जन्म तिथि (DOB), जन्म का सटीक समय और जन्म का स्थान भरें।
अपनी सटीक कुंडली बनाने के लिए आपको इन तीन जानकारियों की आवश्यकता होती है: